प्रसिद्ध भोजपुरी साहित्यकार हरिद्वार प्रसाद ‘किसलय’ की प्रथम पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी और परिचर्चा का आयोजन

प्रसिद्ध भोजपुरी साहित्यकार हरिद्वार प्रसाद ‘किसलय’ की प्रथम पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी और परिचर्चा का आयोजन उनके जन्मस्थान राजापुर (अकरुआं) गाँव में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में किसलय जी के चित्र पर माल्यार्पण हुआ और साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। उसके बाद कृष्णानंद राम ने किसलय जी की रचित कुंडलियां का पाठ किया और उनकी कविताओं को समाज बदलने वाली शक्ति बतलाया। रविदास सेवा संस्थान के उपाध्यक्ष हरेकृष्ण जी ने कहा कि किसलय जी का सपना जात-पात-धर्म से उठकर मानवता की सेवा करना था। धनन्जय कटकैरा ने उनकी कविताओं को हाशिये के समाज के दर्द को बयान करने वाला बतलाया। लालमुनि जी ने कहा कि किसलय जी ने अपनी कविताओं के जरिये अंधविश्वास पर चोट की है। रवि प्रकाश सूरज ने कहा कि किसलय जी निडर कवि थे और उनकी रचनाएं बेहतर समाज की ओर जाने का मार्ग दिखलाती हैं। प्राकृत विभाग के प्राध्यापक प्रो दूधनाथ चौधरी ने कहा कि किसलय जी की रचनाओं को जन-जन तक पहुंचाया जाए और विवि के पाठ्यक्रम में शामिल करवाया जाए और इनकी प्रतिमा भी लगाई जाए। कार्यक्रम का संचालन करते हुए रामयश अविकल ने किसलय जी से जुड़े निजी प्रसंगों को साझा किया और स्वरचित कविताओं का पाठ किया। सुरेंद्र जी और हसनपुरिया जी ने भी किसलय जी की रचनाओं का सस्वर पाठ किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में वरिष्ठ आलोचक जितेंद्र कुमार ने किसलय जी की सही जन्मतिथि बताते हुए इनकी जयंती भी मनाने की बात कही तथा किसलय जी को समाज सुधारक संत कवि तथा छंदशास्त्र का मर्मज्ञ बताया। कार्यक्रम में आसपास के ग्रामीण और कई साहित्यप्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम को सफल बनाने में किसलय जी के पुत्र अनंत जी, ऋषि शंकर के अलावा पौत्रों अभिषेक, अनिकेत, आर्यन, अमन का योगदान रहा

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