इंजीनियरिंग छात्रों के प्रदर्शन मामले में नियम के विरुद्ध नहीं होगा कोई निर्णय : एकेयू

इंजीनियरिंग छात्रों के प्रदर्शन मामले में नियम के विरुद्ध नहीं होगा कोई निर्णय : एकेयू

नेशन भारत, सेंट्रल डेस्क: अपने अनुचित मांगों को लेकर इंजीनियरिंग छात्र-छात्राओं द्वारा कई दिनों से लगातार प्रदर्शन के मामले में आज विश्वविद्यालय ने पुन: अपना रुख साफ किया। इस विषय में विश्वविद्यालय का पक्ष रखते हुए प्रति कुलपति प्रो सैय्यद मो करीम ने कहा कि पूर्व में भी मेडिकल के छात्र-छात्राओं के द्वारा इसी तरह का उपद्रव किया गया था, उस वक्त भी विश्वविद्यालय ने नियमों का सख्ती से पालन करते हुए पुन: परीक्षा का आयोजन नहीं किया था क्योंकि विश्वविद्यालय एक गलत परिपाटी का प्रचलन नहीं करना चाहता। ऐसा करना विश्वविद्यालय और राज्य के हित में नहीं है।

उन्होंने आन्दोलनरत विद्यार्थियों से अनुरोध किया कि वे राज्य के शैक्षणिक माहौल को अपने निजी स्वार्थ में ना बिगाड़ें। आज आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की पहचान परीक्षा तथा अकादमिक कैलेंडर के ससमय पालन करने तथा कदाचारमुक्त परीक्षा का आयोजन कराने के लिए है। उन्होंने कहा कि गलत मांगों की पूर्ति कर हम विश्वविद्यालय का अहित नहीं कर सकते।         

बीटेक प्रथम, तृतीय, पंचम एवं सप्तम सेमेस्टर परीक्षा 2019 से सबंधित तथ्य निम्नलिखित हैं –

1. उपरोक्त परीक्षा के लिए दिनांक 16 अक्टूबर, 2019 को दिसंबर में आयोजित परीक्षाओं के लिए परीक्षा कार्यक्रम घोषित किए गए थे।

2. परीक्षा केन्द्रों के निर्धारण हेतु राज-भवन में विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग के साथ परीक्षा केंद्र निर्धारण पर विस्तृत चर्चा हुई जिसमें यह निर्णय लिया गया कि विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग अंतर्गत तकनीकी संस्थानों तथा राजकीय पोलिटेकनिक संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाया जाए एवं इस सम्बन्ध में विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग द्वारा निर्देश भी जारी किया गया।

3. दिनांक 4 दिसंबर से पूरे बिहार में पॉलिटेक्निक संस्थानों में परीक्षा सुचारू एवं कदाचारमुक्त माहौल में शुरू हुई।

4. दिनांक 4 दिसंबर को ही परीक्षा केन्द्रों राजकीय पोलिटेक्निक, सीतामढ़ी, रापो, राघोपुर, सुपौल एवं बी०एम० एल० टी० लॉ कालेज, पूर्णिया से सूचना आई कि क्रमश: सीतामढ़ी अभियंत्रण महाविद्यालय, सुपौल अभियंत्रण महाविद्यालय एवं पूर्णिया अभियंत्रण महाविद्यालय (कुछ छात्रों को छोड़कर) के छात्रों के द्वारा अपने साथ मोबाइल फोन, नोट्स आदि के साथ परीक्षा भवन में प्रवेश पर रोक होने के कारण परीक्षा का पूर्ण वहिष्कार किया जा रहा है। वीक्षक, केन्द्राधीक्षक एवं जिला प्रशासन  द्वारा समझाने का काफी प्रयास किया गया किन्तु सभी प्रयास बेअसर रहे और छात्र/छात्राएं इस परीक्षा में अनुपस्थित रहें।

5. फलस्वरूप समय बीत जाने के बाद महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षकों एवं छात्र प्रतिनिधियों के द्वारा समझाया गया कि आगे की परीक्षाओं में शामिल हों किन्तु वे परीक्षा में सम्मिलित नहीं हुए।

प्रति कुलपति ने बताया कि शेष सभी परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षाएं सुचारू एवं कदाचारमुक्त माहौल में संपन्न हुईं। साथ ही उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि परीक्षा के उपरांत छात्रों एवं महाविद्यालयों के आवेदनों को परीक्षा समिति की बैठक में रखा गया तथा समिति के सदस्यों ने एकमत से निर्णय लिया कि वैसे छात्र-छात्राएं जिन्होंने अपनी मर्जी से परीक्षा का बहिष्कार सिर्फ इसलिए किया क्योंकि उन्हें परीक्षा में कदाचार से रोका गया उनके लिए विशेष परीक्षा का आयोजन कदाचार एवं अमर्यादा को बढ़ावा देना है। विदित हो कि इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में एक अकादमिक सत्र में दो सेमेस्टर की परीक्षा (प्रथम दिसंबर माह में एवं द्वितीय मई माह में) ही आयोजित किए जाने का प्रावधान है।          

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