बोले राम विलास पासवान- भड़काऊ भाषण का नहीं होना चाहिए समर्थन

बोले राम विलास पासवान- भड़काऊ भाषण का नहीं होना चाहिए समर्थन

नेशन भारत, सेंट्रल डेस्क: लोकतंत्र में विरोध करना सही है, लेकिन विरोध करने के दौरान भी भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. ये कहना है केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का. उनका कहना है कि भड़काऊ बयान नहीं दिए जाने चाहिए. पासवान का यह भी मानना है कि इस तरह एक स्तर बनाए रखना चाहिए और इसका उल्लंघन करने वालों की आलोचना जरूर होनी चाहिए, चाहे वो किसी भी दल के हो. एक निजी साक्षात्कार को दिए इंटरव्यू के दौरान रामविलास पासवान ने ये बातें कही.

इस सवाल पर कि क्या दिल्ली चुनाव के बाद बिहार में भी इस तरह के भड़काऊ बयान देखने को मिलेंगे? इस पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का मानना है कि संसदीय लोकतंत्र में विरोध होना चाहिए, लेकिन भाषाई मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्वीकार किया कि दिल्ली चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण का असर उल्टा पड़ गया.

पासवान ने बिहार विधानसभा चुनाव कामकाज और मुद्दों पर लड़ने की बात कही. इन मुद्दों पर चल रहे आंदोलन पर उन्होंने दलित और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रति जिम्मेदार बताया. पासवान का कहना है कि उनके हितों के खिलाफ कुछ नहीं होने जा रहा है. उनका मानना है कि इस मामले में खुद पीएम नरेंद्र मोदी ने एनआरसी नहीं लागू होने की बात कही है. देश को उनपर भरोसा करना चाहिए.

संवेदनशील होना है जरुरी केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस पर (सीएए और एनआरसी) सारे लोगों की जिम्मेदारी है कि संवेदनशीलता के साथ वो बात करें. उन्होंने सभी को तथ्यों के आधार पर बात करने की सलाह दी. पासवान का मानना है कि पीएम मोदी ने इस समाज (मुस्लिमों) के लिए जिस तरह के फैसले लिए हैं, उसको देखते हुए प्रधानमंत्री की मंशा पर किसी भी तरह का संदेह नहीं करना चाहिए. बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री पासवान ने प्रशांत किशोर (पीके) के राजनीति में उतरने के सवाल पर किसी भी टिप्पणी से इनकार कर दिया.

प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में फैसले पर रामविलास पासवान का मानना है कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकलना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में 100 सांसदों की एक बैठक हुई थी. इस बैठक में आम राय बनी की सरकार से इस मामले को नौवीं अनुसूची में डालने की बात कही जाएगी. जिस कारण इस तरह के मामले में कोर्ट बार-बार नहीं फंसे.

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