आज शायर ए आज़म मिर्ज़ा ग़ालिब साहब की जयंती है.

114

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

“हम आह भी भरते हैं तो हो जाते बदनाम,

वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती”।

आज शायर ए आज़म मिर्ज़ा ग़ालिब साहब की जयंती है.उनकी शेरो-शायरी की पूरी दुनिया कायल है। उर्दू शायरी को उन्होने ऐसी क्लासिकी मुकाम दिया कि उर्दू अदब को उनपर नाज है। उनका अन्दाज-ए-बयां आम व खास सबको पसन्द है। वे अपने आप में बेमिसाल शायर हैं। अब तक तो आप शायद समझ ही गये होंगे कि यहाँ बात किसी और की नहीं बल्कि शायरे आजम मिर्जा ग़ालिब की हो रही है।

- Sponsored -

- Sponsored -

27 दिसम्बर सन् 1797 ई. को मिर्जा असद उल्लाह खाँ ‘ग़ालिब’ का जन्म उनके ननिहाल आगरा के कालामहल में रात के समय में हुआ था। चूंकि इनके पिता फौजी नौकरी में इधर-उधर घूमते रहे इसलिए इनका पालन-पोषण ननिहाल में ही हुआ। पाँच साल की उम्र में ही पिता का साया सर से उठने के बाद चाचा नसीरुल्लाह ने इनका पालन किया जल्द ही उनकी भी मौत हो गयी और यह अपने ननिहाल आ गये। मिर्जा ग़ालिब शुरु में असद नाम से रचनाएँ की तथा बाद में ग़ालिब उपनाम अपनाया।

ग़ालिब ने फारसी की शुरूवाती तालीम आगरा के तत्कालीन विद्वान मौलवी मोहम्मद मोअज्जम साहब से हासिल किया तथा शुरु में फारसी में ग़लज लिखने लगे। इसी जमाने (1810-1811) में मुल्ला अब्दुस्समद जो कि फारसी और अरबी के प्रतिष्ठित विद्वान थे तथा इरान से आगरा आये थे। तब ग़ालिब केवल चैदह साल के थे तथा फारसी पर उनकी पकड़ काफी मजबूत हो गया थी। मुल्ला अब्दुस्समद दो साल तक आगरा रहें इस दौरान ग़ालिब ने उनसे फारसी भाषा एवं काव्य की बारीकियों का ज्ञान प्राप्त किया तथा उसमें ऐसे पारंगत हो गये जैसे कि वह खुद इरानी हों। ग़ालिब से अब्दुस्समद काफी प्रभावित हुये तथा उन्होने अपनी सारी विद्या ग़ालिब में उँडेल दी। शिक्षा के प्रारम्भिक दौर से ही ग़ालिब शेरो-शायरी करने लगे थें। मात्र तेरह साल की उम्र में ही ग़ालिब की शादी 09 अगस्त 1890 ई. को लोहारू के नवाब अहमद बख्श खां के छोटे भाई मिर्जा इलाही बख्श ‘मारूफ’ की लड़की उमराव बेगम से हुई। उस वक्त उमराव बेंगम की उम्र केवल 11 साल की थी। शादी के पहले ग़ालिब कभी-कभी दिल्ली जाते थे मगर शादी के दो-तीन साल बाद तो दिल्ली के ही हो गये। उन्होने इस वाकया का जिक्र अपनी किताब उर्दू-ए-मोअल्ला में करते हुए लिखा है कि ‘07 रज्जब 1225 हिजरी को मेंरे वास्ते हुक्म दवाये हब्स साहिर हुआ। एक बेड़ी मेरे पांव में डाल दी गयी और दिल्ली शहर को कैदखाना मुकर्रर किया गया और इस कैदखाने में डाल दिया गया।’

लता मंगेशकर ने ट्वीट कर कहा

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

- Sponsored -

- Sponsored -

Comments
Loading...

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More