सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में किया 3 ई-सेवा केंद्रों का उद्घाटन- ये तीन ई कोर्ट पटना हाईकोर्ट, पटना सिविल कोर्ट और मसौढ़ी कोर्ट हैं

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में किया 3 ई-सेवा केंद्रों का उद्घाटन- ये तीन ई कोर्ट पटना हाईकोर्ट, पटना सिविल कोर्ट और मसौढ़ी कोर्ट हैं

इंडिया सिटी लाइव (पटना)24 MARCH : अब ई-सेवा केंद्रों के माध्यम से सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी अपने मुकदमे के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. पटना हाईकोर्ट, पटना सिविल कोर्ट और मसौढ़ी पंचायत के लखनौर गांव में ई-सेवा केंद्र की शुरूआत आज से हो गई है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डॉ. डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को पटना हाईकोर्ट सहित तीन ई-सेवा केंद्रों का उद्घाटन वीडियो कांफ्रेंसिंग के मध्यम से की.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोरोना काल में हम सभी ने एक तरह की समस्याओं का सामना किया है.. कई लोगों ने बहुत कुछ खोया भी है लेकिन तमाम चुनौतियों के बीच हमें एकजुट होकर आगे बढ़ना है. कागजी तामझाम को छोड़कर तकनीक के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया का निपटारा करने पर जोर देना है, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर ई-सेवा केंद्रों की स्थापना देशभर में की जा रही है. बिहार में फिलहाल तीन ई-सेवा केंद्रों की शुरूआत की गई है और जल्दी ही राज्य के अन्य जिलों में भी ऐसे केंद्रों की स्थापना की जाएगी ताकि सरल तरीके से लोगों को न्याय सुलभ हो सके.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि बिहार की अदालतों में 1004 सेशंस केस पिछले 30 सालों से लंबित हैं जबकि इस बात की भी जानकारी मिली कि दरभंगा की अदालत में एक पार्टिशन सूट 157/52 पिछले 69 वर्षों से सुनवाई की राह देख रहा है. मोतिहारी के सीजेएम कोर्ट में एक मुकदमा 48 वर्षों से लंबित है. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक साल के कोरोना काल में ( मार्च 2020 से मार्च 2021 ) बिहार की निचली अदालतों में कुल 5.4 लाख मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें 2.37 लाख का निपटारा हुआ. उन्होंने कहा कि इन बातों का उल्लेख मैं आलोचना के लिए नहीं कर रहा बल्कि बिहार के संदर्भ में इन आंकड़ों को प्रस्तुत कर रहा हूं ताकि सही तरीके से मॉनेटरिंग हो सके.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायपालिका को भी अब आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत है. उन्होंने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल की तारीफ करते हुए कहा कि उनके प्रयास से ही ई सेवा केंद्रों की शुरूआत हो सकी है. इस अवसर पर न्यायमूर्ति संजय करोल, न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय तथा न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए.

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