विधानसभा के उपाध्यक्ष का चुनाव – जहां एनडीए की तरफ से महेश्वर हजारी मैदान में हैं तो वहीं महागठबंधन ने भूदेव चौधरी को मैदान में उतारा

विधानसभा के उपाध्यक्ष का चुनाव – जहां एनडीए की तरफ से महेश्वर हजारी मैदान में हैं तो वहीं महागठबंधन ने भूदेव चौधरी को मैदान में उतारा

इंडिया सिटी लाइव (पटना)23 MARCH : उपाध्यक्ष पद के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष एक बार फिर से आमने-सामने है. मंगलवार को एनडीए और महागठबंधन दोनों के उम्मीदवारों ने बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है. एनडीए की ओर से जदयू विधायक महेश्वर हजारी तो महागठबंधन की तरफ से राजद विधायक भूदेव चौधरी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. बुधवार को उपाध्यक्ष पद के लिए विधानसभा में चुनाव कराया जाएगा.

कल होने वाले चुनाव के लिए एनडीए और महागठबंधन के विधायकों को सदन में मौजूद रहने का निर्देश आज ही दे दिया गया है. बिहार में बजट सत्र की समाप्ति में अब सिर्फ दो दिन शेष रह गया है इसी बीच अब विधानसभा के नये उपाध्यक्ष को लेकर हलचल तेज हो गई है. सत्ताधारी गठबंधन उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भी अपने विधायक को बिठाने की पूरी प्लानिंग कर ली है.

विस उपाध्यक्ष पद को लेकर सत्ता पक्ष की तरफ से जेडीयू विधायक महेश्वर हजारी ने नामांकन दाखिल किया है. बिहार विधानसभा के सचिव राजकुमार सिंह के कक्ष में नामांकन पत्र दाखिल किया गया. इस मौके पर खुद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहे. बता दें कि महेश्वर हजारी महादलित समाज से आते हैं और पूर्व मंत्री हैं. इस बार इन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी लेकिन अब जेडीयू नेतृत्व ने विधानसभा उपाध्यक्ष की कुर्सी देने के लिए नामांकन किया है.

उधर जदयू की तैयारी देख विपक्ष ने भी अपने उम्मीदवार भूदेव चौधरी को मैदान में उतार दिया है . उम्मीदवार उतारने के पहले तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के सभी घटक दलों के नेताओं के साथ बैठक की और बैठक में यह निर्णय लिया कि महागठबंधन के उम्मीदवार भूदेव चौधरी होंगे. राजद ने दावा किया विधानसभा के उपाध्यक्ष का पद हमेशा विपक्ष को दिया जाता है लिहाजा एनडीए को यह पद विपक्ष को दे देना चाहिए, हालांकि महागठबंधन की तरफ से विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भी उम्मीदवार उतारा गया था जिसमें उनकी हार हुई थी .
इस बार विधानसभा के अध्यक्ष पद पर बीजेपी के विधायक विजय कुमार सिन्हा काबिज हैं. विधानसभा चुनाव में बीजेपी को अधिक सीटें मिलने की वजह से भाजपा नेतृत्व ने अध्यक्ष की कुर्सी सहयोगी दल जेडीयू से ली थी, हालांकि उपाध्यक्ष की कुर्सी सहयोगी जेडीयू के छोड़ दी है. अब सभी को इंतजार कल के चुनाव का है जब विधानसभा के उपाध्यक्ष पद पर चुनाव होगा, ऐसे में देखना होगा कि जीत किसकी होती है.

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