एएनसी जांच से दूर होती है प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं : डॉ. सुधीर

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एएनसी जांच से दूर होती है प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं : डॉ. सुधीर

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• प्रसव के पूर्व काम से कम चार बार गर्भवतियों को करानी चाहिए जांच
• प्रसव पीड़ा होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल के चिकित्सक से करें मुलाकात
• सभी पीएचसी, अर्बन पीएचसी के अलावा अनुमंडल और सदर अस्पताल में है लेबर ओटी
बक्सर, 24 मई | जिले में स्वास्थ्य विभाग के स्तर से मातृ व शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए लगातार सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। लेकिन, जानकारी के अभाव में या अपरिहार्य कारणों से लोग सरकारी सुविधाओं व सेवाओं का लाभ नहीं उठाते। जिसके बाद उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं सेवाओं में से एक है प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) और प्रसव सुविधाएं। जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं, उसके बावजूद लोग निजी संस्थानों की ओर मुख कर लेते हैं। हालांकि, गर्भधारण के बाद से लेकर प्रसव के बाद कई योजनाएं और सुविधाएं हैं, जिनका लाभ लोग उठा सकते हैं। लेकिन, इसके लिए उन्हें सरकारी सेवाओं और व्यवस्थाओं पर भरोसा करना होगा। आज जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में एएनसी जांच की सेवा नि:शुल्क उपलब्ध है। वहीं, सभी पीएचसी व अर्बन पीएचसी के साथ अनुमंडल और सदर अस्पताल में प्रसव सेवाएं और सुविधाएं सुदृढ़ है। जिसका लाभ गर्भवती महिलाएं और उनके परिजन उठा सकते हैं।
प्रसव पूर्व जांच की भूमिका महत्वपूर्ण :
सदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया, गर्भावस्था के दौरान प्रसव पूर्व जांच की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। है गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार बार एएनसी जांच करानी चाहिए। इससे प्रसव के पूर्व या प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। वहीं, कई मामलों में मातृ मृत्यु की संभावनाओं को भी खत्म किया जा सकता है। उन्होंने बताया, गर्भावस्था और प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताएं मातृ मृत्यु के लिए अधिक जिम्मेदार होती हैं। इसके अलावा महिलाओं की मृत्यु के पीछे कई कारण भी हो सकते हैं। महिलाएं अगर मातृ मृत्यु के कारणों के संबंध में सही समय पर जानकारी मिल जाए, तो उसका समुचित उपचार हो जाएगा जिससे मातृ मृत्यु की दर में कमी लाई जा सकती है। मातृ मृत्यु को रोकने के लिए उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की जाती है। इसके लिए हर माह की 9वीं तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं का किया जाता है।
सरकारी सुविधाओं व सेवाओं पर भरोसा करें लोग :
‘सरकारी अस्पतालों में पूर्व की अपेक्षा स्वास्थ्य सेवाएं और सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा चुका है। अब प्रखंड स्तर पर भी प्रसव संबंधी सारी सेवाओं और सुविधाओं को बहाल किया जा चुका है। लेकिन, इसके अलावा लोगों को भी जागरूक होना होगा। प्रसव अपने आप में एक जटिल प्रक्रिया है। लेकिन, समय पर प्रसव होने से जच्चा बच्चा दोनों सुरक्षित रहते हैं। प्रसव की सटीक जानकारी के लिए गर्भवती महिलाएं नियमित एएनसी जांच कराएं। साथ ही, प्रसव पीड़ा शुरू होने की स्थिति में गर्भवतियों को चिकित्सक के पास ले जाया जा सके। ताकि, उनके प्रसव के पूर्व और उसके दौरान जटिलताओं को दूर किया जा सके।’ – डॉ. अनिल भट्ट, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी

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