दीघा-एम्स एलिवेटेड रोड – बिहार के लोगों को सीएम नीतीश ने दी सौगात

दीघा-एम्स एलिवेटेड रोड – बिहार के लोगों को सीएम नीतीश ने दी सौगात

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज बिहार के सबसे लंबे एम्स-दीघा एलिवेटेड पथ का उद्घाटन किया। इस मौके पर डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी, पथ निर्माण मंत्री मंगल पांडेय, सांसद रामकृपाल यादव, विधायक रीतलाल यादव मौजूद रहे.

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा की एम्स – दीघा एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण का उदेश्य पटना स्थित एम्स हॉस्पिटल को बिहार राज्य के सुदूर क्षेत्रों एवं उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से द्रुत गति सम्पर्कता प्रदान करने हेतु किया गया है. इसके निर्माण के लिए उन्होंने सात वर्ष पहले जो सपना देखा था आज उसे पूरा कर एम्स पटना आने वाले मरीजों के लिए वरदान का रूप दिया है. साथ ही पटना से उत्तर बिहार आने जाने वालों और दक्षिण क्षेत्र से गंगा पार आने जाने वालों को काफी सहूलियत और कम समय मे आवागमन हो सकेगा.

इसके शुरू होने से जेपी सेतु के तरफ जाने वाले वाहनों को उत्तर बिहार जाने में सहूलियत होगी। वहीं उत्तर बिहार से पटना, बिहटा, एम्स या अरवल, औरंगाबाद जाने के लिए आसानी हो जाएगी। इससे पटना सहित उत्तर बिहार की यात्रा सुगम होगी। उत्तर बिहार के लोगों को दक्षिण बिहार और एम्स पहुंचने में ज्यादा लंबी दूरी तय नहीं करनी होगी। वहीं, बिहार राज्य पथ विकास निगम (बीएसआरडीसी) के एमडी संजय अग्रवाल ने बताया कि यह बिहार का सबसे लम्बा ऐलिवेटेड पथ होगा। 

जानकारी के मुताबिक 1289.25 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 12.27 किलोमीटर लम्बा यह पथ बिहार का सबसे लंबा एलिवेटेड पथ है। पटना-दिल्ली रेललाइन के ऊपर 106 मीटर लंबा रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) इंजीनियरिंग का अनूठा नमूना है।

नेहरू पथ पर पूर्व से निर्मित आरओबी के कारण एलिवेटेड पथ की ऊंचाई लगभग 25 मीटर है, जिसका निर्माण अपने आप में काफी चुनौतीपूर्ण था। उसे भी सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया। यह पथ व्यवसायिक दृष्टिकोण से भी लाभप्रद होगा। इसके अलावा राजधानी की सड़कों पर दबाव भी कम होगा और लोगों को जाम से भी मुक्ति मिलेगी।

ये बिहार का पहला एलिवेटेड कॉरिडोर है। बेली रोड नहर फ्लाईओवर के ऊपर से ये पुल गुजरा है। 12 किमी लंबे पुल पर कोई भी यू-टर्न नहीं है। इस पुलस से हाजीपुरए छपराए बख्तियारपुर आना-जाना आसान होगा। साथ ही पटना के यूपी के गाजीपुर तक जाना आसान होगा। साथ ही गांधी सेतु पर बड़ी गाड़ियों का दबाव भी कम होगा।

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