रोहतास के अपराधियों ने की थी हत्या..

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रोहतास के अपराधियों ने की थी हत्या..

दुर्गेश की हत्या करने वाले शूटर समेत छह अपराधी हथियार के साथ चढ़े पुलिस के हत्थे

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पुलिस ने किया हत्याकांड का उद्भेदन..

बक्सर से कपीन्द्र किशोर की रिपोर्ट

बक्सर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगा है. पुलिस ने दुर्गेश हत्याकांड का खुलासा कर लिया है.पटना के बेउर जेल में बंद एक अप्राधिबके इशारे पर दुर्गेश की हत्या की गई है. इसके लिए बाहर से दो शूटर बुलाये गए थे. पुलिस ने दुर्गेश की हत्या करने वाले शूटर समेत छह अपराधियों को हथियार साथ गिरफ्तार किया है. साथ ही घटना में प्रयोग की गई बाइक और छह मोबाइल को जब्त किया है. पुलिस ने सभी से पूछताछ के बाद सभी को जेल भेज दिया. साथ ही सभी के निशानदेही पर मुख्य आरोपी अरुण यादव की गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है.  लेकिन मामले में पुलिस को संतुष्टि नही मिली. इसके बाद प्रशिक्षु एसडीपीओ अमरनाथ के नेतृत्व में एक SIT टीम का गठन किया गया. इसके बाद गठित टीम ने जांच किया तो पता चला कि घटना में लाइनर का काम सुमित कुमार और विकास कुमार ने किया है. इसके बाद पुलिस ने सोमवार की रात गजाधरगंज में छापेमारी कर विकास कुमार यादव और सुमित कुमार उर्फ खुबलाल गिरफ्तार किया. पुलिस ने दोनों से पूछताछ किया गया तो दोनों ने बताया कि महदह गाँव के संजय यादव का लड़का अरूण यादव हमलोगो को बताया कि कोरानसराय थाना के दिलीप यादव जो बैरियों गाँव के रहने वाले है. अभी वह पटना के बेउर जेल में बंद है. जो इनके रिश्ते में मामा लगते है. बैरिया गांव के का रहने वाला दुर्गेश सिह अपने आप को दबंग साबित करना चाहता है. सभी लोगों से कहता है कि बैरिया में सिर्फ मेरा चलेगा यहाँ दिलीप यादव का नहीं चलेगा. इसके लिए जेल में बंद दिलीप ने अरूण यादव को दुर्गेश सिंह की हत्या करने का जिम्मा सौपा गया. जहां दिलीप यादव ने अरुण से कहा कि अगर तुम द् दुर्गेश सिंह की हत्या कर दोगे तो उस क्षेत्र में तुम्हारा दबदबा कायम हो जायेगा. लोग तुम्हारे नाम से डरेंगे. इसके बाद अरुण अपने दबदबा कायम करने को लेकर जुट गया. जहां 17 दिसंबर को अरुण के घर एक मिटिंग रखा गया.  जिसमें विकास कुमार यादव, सुमित कुमार उर्फ खुलबलाल, अरुण यादव,  रामदेश्वर कुमार उर्फ भुलन, श्यामकुमार उर्फ लड्डु मौजूद थे. मीटिंग में  विकाश कुमार यादव को महदह पुल पर रैकी करने तथा सुमित कुमार उर्फ खुबलाल को 11 नं० लख पर रैकी का काम सौपा गया.  जिसमें पुलिस की गतिविध पर नजर रखना था. वही घटना को अंजाम देने के लिए रणनीति तैयार की जाने लगी. इसी बीच 20 दिसम्बर को दुर्गेश सिंह शहर के पी०सी० कॉलेज के पास आया था. जहाँ पर सुमित भी मौजूद था. दुर्गेश सिंह द्वारा सुमित से बातचीत के क्रम में बताया गया कि उसे अभी बभनी जाना है. फिर पुनः बक्सर आना है. इस बात की सूचना मिलते ही  सुमित कुमार ने इसकी सूचना अरुण यादव को दिया गया. इसके बाद अरूण यादव ने विकाश यादव को महदह पुल के पास रैकी करने के लिये लगा दिया. जैसे ही दुर्गेश सिंह अपने दोस्तों के साथ बभनी से बक्सर की ओर आने लगे तो विकाश यादव दने इसकी सूचना अरूण यादव को दिया. सूचना मिलते ही अरुण यादव अपने दो साथियों के साथ तैयार हो गया. इसके बाद एक उजला रंग की अपाची मोटरसाईकिल पर अरूण यादव अपने दोस्त रामेश्वर कुमार उर्फ भुलन और श्यामकुमार उर्फ लड्डु के साथ मिलकर 1 नं० लख के समीप दुर्गेश सिंह के  बाइक को ओवरटेक कर फायरिंग शुरू कर दिया. जिससे दुर्गेश सिंह और उसके दोस्त बाइक लेकर सड़क के किनारे चाट में गिरा गए. जहां तीनों भागने लगे. वही अरुण दुर्गेश का पीछा कर उसे गोली मार दिया गया. जिससे घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गयी. इसके बाद सभी लोग वहां से अलग-अलग जगह भाग निक वही रामेश्वर कुमार उर्फ भुलन एवं अशोक कुमार उर्फ लड्डु ने दुर्गेश की हत्या करने की बात को स्वीकार किया गया है. फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपित अरुण यादव की गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी कर रही है. साथ ही पटना के बेउर जेल में बंद दिलीप से भी पूछताछ की जाएगी.

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